20 Jan 2010

...

खामोश हैं आज ;
कुछ केहना बी तो नहीं हैं |
ना कोई अधूरी काहानी है , नाही कोई आगाज़ जिसके अंजाम की उम्मीद  हो |
ना कोई किरदार; न कोई शक्ल जिक्सके धुंधले होने का दम भरें  |
कोई ख्वाब बी नहीं हैं के जिसके टूटने पर उदासी हो ; नाही कोई चाहत ना कोई आस |
कोई सवाल ही नहीं हैं के जिसके जवाब मैं रातों को जागा करें; कोई उलझन ऐसी जिसके सुलझने की फ़रियाद करें  |
ना तेरा साया है , ना तेरी तस्वीर  ;
ना तेरे जिस्म की प्यास; ना तेरे थर्राते होटों से अपना नाम सुन ने की चाहत कोई  |
नाही कोई बैचैनी  है; नाही कभी दबी हुई, कभी उखड़ी हुई सांस ;
नाही नींद |


एक अनजाना  ठहराव  है बस ; कुछ खामोश से हैं आज |

5 comments:

  1. freaking amazin...and thank god u didnt blog this in english...destroys the whole charm of it

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  2. i can relate to it.. :(
    only can't write it tht way! :D
    gud wrk! way 2 go!!!

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  3. @jaky, juggernaut, anonymous: thnks a ton.

    @juggernaut: yeah i agree language seems to make a huge impact for no apparent reason.

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  4. i love the lines...both the english and the hindi ones!

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